जैव_विविधता
सर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः ।सर्वे भद्राणि पश्यन्तुमा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अर्थात् सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने।हे भगवन हमें ऐसा वर दो! यही भावना जैव विविधता के मूल में है। ऐसा बताया जाता है कि हमारे शरीर में ९०%…






