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बेईमानी है अतीत पर पछतावा

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जो बीत चुका है, उसको बार-बार दोहरा कर वर्तमान को नहीं सुधारा जा सकता। इसलिए ‘काश ऐसा होता या काश वैसा होता’ में उलझने की बजाय, जो वर्तमान में है, उसको संभालने और सुधारने की कोशिश करें।

महात्मा गांधी ने कहा था- ‘हमारा भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने वर्तमान में क्या कर रहे हैं।’

ह कथन अपने आप में बहुत कुछ समेटे है। जिसने इसे समझ लिया उसका जीवन सरल हो गया। हम सब कभी न कभी यह जरूर सोचते हैं कि अमुक व्यक्ति वैसा क्यों है और हम ऐसे क्यों हैं!

यह भिन्नता सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक रूप में किसी भी तरह की हो सकती है। इसका सबसे सरल उत्तर यह है कि हमारे द्वारा अतीत में लिए गये फैसले और चुनाव हमारे वर्तमान का निर्माण करते हैं। मसलन, आम का बीज बोने पर निश्चित रूप से आम का ही पेड़ उगेगा। इसी तरह हमारे अतीत के कर्म और फैसले हमारे वर्तमान को प्रभावित करते हैं। दिलचस्प यह है कि ये फैसले किसी भी चीज के बारे में हो सकते हैं।

जैसे, आज आपका दफ्तर जाने का मन नहीं है, तो आप फैसला करेंगे कि आज आप आराम करेंगे या बरसों तक अपनी सेहत को नजरअंदाज करने के बाद आप एक दिन तय करते हैं कि अब आप खुद पर ध्यान देना शुरू करेंगे। इन दोनों बातों में आपके फैसले का समान रूप से प्रभाव आप ही पर पड़ रहा है। पर कभी-कभी कुछ ऐसे फैसले भी होते हैं, जो हमारे जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि जीवन में कोई कदम उठाने से पहले इस बात को समझने की कोशिश कर ली जाए कि आपके भविष्य पर उसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है।

काश! ऐसा होता

अकसर विपत्ति की घड़ी में हम अपने जीवन का आकलन करने लगते हैं और सोचने लगते हैं कि अगर ऐसा नहीं किया होता, तो जीवन शायद बेहतर होता, या अगर उस वक्त मैंने वो फैसला नहीं लिया होता, तो आज मैं ज्यादा सुखी होता। पर, सच्चाई यह है कि जो बीत चुका है, उसको बार-बार दोहरा कर वर्तमान को नहीं सुधारा जा सकता। इसलिए ‘काश ऐसा होता या काश वैसा होता’ में उलझने की बजाय जो वर्तमान में है, उसे संभालने और सुधारने की कोशिश करें।

करें स्वयं को तैयार

कभी-कभी जीवन में कुछ ऐसा घटित हो जाता है, जिसे आप देखते और समझते हुए भी स्वीकार नहीं करना चाहते। यह दुख किसी भी तरह का हो सकता है। कोई व्यक्ति अपने पिछले किसी बुरे कर्म की वजह से वर्तमान में दुखी होता है, तो कोई अपने किसी प्रियजन को कष्ट में देखकर दुखी होता है। पर, दोनों की स्थितियों में दुख का मूल भाव समान रूप से बना रहता है।

ऐसे में कोई व्यावहारिक निर्णय लेना बिलकुल आसान नहीं होता, पर सच्चाई यह है कि स्थिति को और बिगड़ने से बचाने के लिए किसी नतीजे पर पहुंचना जरूरी भी होता है। इसलिए ऐसी किसी कठिन स्थिति का सामना करने पर खुद से ईमानदारी से यह सवाल करें कि जिस वर्तमान में आप जी रहे हैं, क्या आप उसमें खुश हैं?

और, जिन चुनौतियों से आप लड़ रहे हैं उनसे कब तक लड़ पाएंगे? या कहीं ऐसा तो नहीं कि आप हर संकटमय स्थिति के लिए स्वयं को दोषी मानते हैं। और यदि सब ऐसे ही चलता रहा तो भविष्य में हालात सुधरने की क्या संभावनाएं हैं? जब आप यह सारे सवाल खुद से पूछने लगेंगे, तो निश्चित रूप से स्वयं को कोई सही और व्यावहारिक फैसला लेने के लिए तैयार कर पाएंगे।

पछतावा नहीं सबक लें

जिंदगी में हमेशा सब हमारे चाहे अनुसार नहीं होता। कभी-कभी हम कुछ फैसले भविष्य के प्रति बहुत आशावान होकर लेते हैं। और कभी-कभी कुछ फैसले स्वार्थी बनकर ले लेते हैं, क्योंकि हम सोचते हैं कि मेरे इस फैसले से किसी और का क्या नुकसान होगा। उस समय हम सिर्फ अपनी ही खुशी देख रहे होते हैं। पर, जीवन हमें नित-नए अनुभव देता है। कुछ लोग साथ छोड़ते हैं तो कुछ लोग साथ में जुड़ते हैं और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हमारे अतीत के किसी स्वार्थ भरे फैसले का खामियाजा वर्तमान में हमसे जुड़े लोगों को भी भुगतना पड़ता है।

ऐसे में पाश्चाताप और ग्लानि जीवन को और दूभर बना देते हैं। पर, यदि तब भी संभल जाया जाए और अपनी पुरानी गलतियों को सुधार लिया जाए, तो उनसे सबक लेकर वर्तमान को बेहतर बनाया जा सकता है।

यहाॅ बात भाग्यवादी होने की कतई नहीं है। लेकिन, इस सत्य को भी नकारा नहीं जा सकता कि हमारे पिछले कर्म और फैसले हमारे वर्तमान को बनाते और बिगाड़ते हैं। इसलिए बेहतर है कि कोई गलती हो जाने पर उससे सबक लिया जाए, न कि उससे दोहराया जाए या फिर उस पर पछतावा किया जाए।

चुनें सही राह

जीवन एक ऐसी यात्रा है, जिसमें अनेक मोड़ और उतार-चढ़ाव आते हैं। कभी-कभी कुछ ऐसी स्थितियां भी आती हैं, जो हमें एक दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती हैं। ऐसी स्थिति में दिल कुछ और करने की सलाह देता है और दिमाग कुछ और करने की बात कहता है। बेशक, यह स्थिति किसी के लिए भी बहुत चुनौतीपूर्ण होती है, पर यदि ऐसे हालात में आप संयम और समझदारी से काम ले सकें, तो उस चुनौती को आसानी से पार कर सकते हैं।

और, कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि काश हम अपने अतीत की गलतियों को सुधार पाते, ताकि वर्तमान में हो रही पीड़ा से हमारे हृदय में ग्लानि न पैदा होती! फिर, यह भी महसूस होता है कि काश हम भविष्य में झांक पाते कि आगे क्या होगा! लेकिन, इस बात का उत्तर किसी के पास नहीं है। ऐसे में सिर्फ अपने अंतर्मन की आवाज सुनकर आगे बढ़ना ही एकमात्र विकल्प है।

Sushmita

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