चांद की तरह हमारी यात्रा भी अमावस से पूनम तक पहुंचकर पूरी होती है। अभावों का अंधेरा हमें डराता है और समृद्धि की रोशनी अपनी ओर खींचती है। अच्छे भावों से बुरे भावों की ओर बढ़ना ही अमावस है। जिंदगी के अंधेरों को दूर करने के लिए सुंदर भावों की रोशनी होना जरूरी है।
खुद से मुंह मोड़ना, अपनी सच्चाई को नजरअंदाज करना, हमें अभावों की ओर धकेलता है। हम अपना सच सुन सकें, कह सकें, उसके साथ शांति से रह सकें, यह सबसे बड़ी समृद्धि है। जेब भले ही हल्की हो, पर हम हर नई सुबह खुद के लिए ज्यादा भरोसे के साथ कदम बढ़ा सकें, इससे बढ़कर और कोई खुशी नहीं हो सकती।
विनय
उत्तराध्ययन सूत्र में विनय को धर्म का मूल कहा है। विनय के बिना विवेक नहीं होता और विवेक के बिना जो कुछ भी होता है, वह टिक नहीं पाता। चिंतक कंफ्यूशियस ने भी विनय, विनम्रता को व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण माना है। दूसरों को नीचा दिखाना, उनसे रूखे ढंग से बात करना, उन्हें हमसे दूर कर देता है। शालीनता के साथ मजबूती से डटे रहना ही हमारी समृद्धि के रास्तों को खोलता है। विनम्रता, सबसे समान व्यवहार करती है। हमारी समृद्धि कई गुणा बढ़ जाती है, जब उसमें दूसरों की मुस्कराहटें, उनके प्यार और साथ की भी जगह होती है।
सहजता
समभाव को सबसे सुंदर भाव कहा गया है। पर यह सुंदरता सहजता के बिना जीवन में नहीं आ पाती। जिन बातों पर हमारा जोर ही नहीं है, उन्हें अपने काबू में करने की जिद हमें असहज बना देती है। हमारा डर और लालच हमारी चुनौतियों को और भी बड़ा बना देते हैं। जीवन के कुछ उतार-चढ़ाव ऐसे होते हैं, जिन्हें स्वीकार करके ही आगे की यात्रा को सुखद बनाया जा सकता है। अपने गुस्से को काबू में रख पाना जीवन में शांति लाता है। सहजता हमें उस आजादी की ओर ले जाती है,जहां कड़वी यादें, हमें देर तक उलझाए और अटकाए नहीं रहतीं। अपने ही सुख-दुख में डूबे-रहने वाला मन ना दूसरों से जुड़ पाता है और ना ही अपने साथ उन्हें जोड़ पाता है।
ज्ञान
ज्ञान का दीया, अज्ञान के अंधेरे को दूर करने के लिए जरूरी है। ज्ञान की एक रोशनी अंधेरे और सूने पड़े कई कोनों को रोशन कर देती है। एक दीप से कई दीप जगमगाने लगते हैं। तरक्की के कई नए सोपान खुलने लगते हैं। समृद्ध दिमाग उत्सुकता से भरा होता है। वह नए ज्ञान से मुंह नहीं मोड़ता। अच्छी किताबें पढ़ना, अच्छे लोगों से बातचीत करना, अपनी जानकारी से दूसरों की जिंदगी को आसान बनाना, हमें लगातार समृद्धि की ओर ले जाता है।
प्रेम व करुणा
बड़े दिलवाले, खुद समस्याओं से घिरे होने पर भी दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे की मदद का यह सिलसिला, सबको समृद्ध बनाता है। फिर मदद केवल पैसे की ही नहीं होती, कई बार सबसे बड़ी जरूरत दूसरों के समय और साथ की होती है। असल समृद्धि वही है, जिसमें सबके लिए प्रेम व करुणा हो, हम दूसरों के दर्द को समझ सकें, उनकी तारीफ करें, उन्हें अच्छा एहसास कराएं और दूसरों के सपनों को पूरा करने में मदद कर सकें।
प्रेम की कमी माफ करने से भी रोकती है और माफी मांगने से भी। प्यार का उजाला जिंदगी के हर अभाव को दूर कर देता है। कहा जाता है कि प्यार और करुणा की रोशनी में ही हमेशा टिकने वाली सात्विक लक्ष्मी का वास होता है।
धैर्य
जहां हर कोई तुरंत अपनी इच्छाओं को पूरा करने की दौड़ लगा रहा हो, वहां एक-दूसरे से टकराने, भिड़ने की आशंका बनी रहती है। कदम-कदम पर हमारे धैर्य को चुनौती मिलती है। जीतता वो है, जो कभी धीरे तो कभी तेज, गति से बढ़ता रहता है। अपने लक्ष्यों को पूरा करने और उन्हें पूरा न कर पाने वालों में एक बड़ा अंतर धैर्य का होता है। कई दफा हम उस समय हार मान लेते हैं, जब मंजिल के सबसे करीब होते हैं। धीरज के साथ उन चीजों को हासिल करना भी आसान हो जाता है, जो एक समय में मुश्किल लग रही होती हैं। लक्ष्य हासिल करने की दिशा में पर्याप्त समय देने की जरूरत होती है।
लेखक पूनम जैन
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