Categories: HEALTH AND WELLNESS

जैव_विविधता

Spread the love

सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अर्थात् सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने।
हे भगवन हमें ऐसा वर दो!

यही भावना जैव विविधता के मूल में है। ऐसा बताया जाता है कि हमारे शरीर में ९०% कोशिकाएँ माइक्रोब्ज यानी सूक्ष्म जीवाणुओं की है। सूक्ष्म जीवाणु जैसे कि बैक्टीरीया, फ़ंगस, वाइरस आदि। हमें लग सकता है कि कितना कचरा भरा हुआ है हमारे शरीर में। लेकिन इन ही सूक्ष्म जीवाणुओं के कारण हम सब जीवित हैं। यदि हमारा शरीर स्टेरायल हो जाए तब हम जीवित नही रहेंगे। हमारे जीवित रहने के लिए बहुत सारे अनिवार्य कार्य यही सूक्ष्म जीवाणु ही करते हैं। इम्यूनिटी सिस्टम, पाचन तंत्र, डीटॉक्स आदि सबमें हमारे शरीर में स्थित इन खरबों सूक्ष्म जीवाणुओं की अनिवार्य भूमिका है।

ऐसे में इन सूक्ष्म जीवाणुओं के प्रति हमारी आधुनिक धारणा इतनी भिन्न क्यों है? इन सूक्ष्म जीवाणुओं में कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे। लेकिन प्रकृति ने इन दोनो प्रकारों के बीच संतुलन बना कर रखा है। यह इतना अद्भुत संतुलन है कि अच्छे जीवाणुओं के संगत में जो बुरे हैं वह या तो प्रभावहीन हो जाते हैं या वो अच्छे के तरह काम करने लगते हैं। लेकिन ऐसा तब तक ही होता है, जब तक दोनो प्रकार के सूक्ष्म जीवाणुओं के बीच संतुलन बना रहे। जैसे ही संतुलन बिगड़ेगा वैसे ही बुरे वाले हावी होने लगते हैं और अनेक प्रकार की शारीरिक और मानसिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होने लगती हैं।

थोड़ा समझने का प्रयास करते हैं कि यह संतुलन किन किन कारणों से बिगड़ सकता है। जब हम प्रकृति के नियमों के विरुद्ध जाते हैं तब स्वाभाविक है कि संतुलन बिगड़ेगा। उदाहरण की लिए जब हम ऐंटीबायआटिक का सेवन करते हैं, तब बुरे के साथ-साथ अच्छे सूक्ष्म जीवाणु भी मरने लगते है। आज ऐंटीबायआटिक का सेवन आम और बहुत अधिक मात्रा में होने लग गया है। ऐंटीबायआटिक के सेवन के बाद हम संतुलन वापस बनाने के लिए कोई ठोस प्रयास तो नही ही करते हैं ऊपर से कुछ ही दिनों बाद पुनः ऐंटीबायआटिक का सेवन कर लेते हैं। ऐसे में धीरे धीरे संतुलन और बिगाड़ने लगता है। और भी कई ऐसी रासायनिक दवाइयाँ हैं जिनका सेवन अब आम हो गया है जो कि संतुलन को और अधिक बिगाड़ रही हैं।

ऐसे ही अपने खाने-पीने में अत्यधिक रसायनों का प्रयोग, कृत्रिम तेल, नमक, चीनी, दूध आदि। या अपने दिनचर्या में रासायनिक उत्पादों का भरपूर मात्रा में प्रयोग। इन सबसे हम सूक्ष्म जीवाणुओं की जैव विविधता को क्षति ग्रस्त कर रहे हैं। यह नही समझ पा रहे हैं कि जिन सूक्ष्म जीवाणुओं को हम अपनी आँखों से देख तक नही पाते हैं, उनके संतुलन और स्वास्थ्य पर केवल हमारा स्वास्थ्य, प्रसन्नता और इम्यूनिटी ही नही बल्कि हमारा अस्तित्व निर्भर है। आज हम अपनी अदूरदर्शिता के कारण अपने ही अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।

यदि अब भी हम अपनी अज्ञानता के कारण जैव विविधता को नही समझ पाये, तब हम आने वाली पीढ़ियों के प्रश्नों के उत्तर ढूँढते रह जाएँगे। हमारा अस्तित्व इसी विविधता के संतुलन में है। हम आज अपने-अपने बहाने से इस विविधता और उसके संतुलन को समाप्त करने पर तुले तो हुए हैं, लेकिन यह नही समझ पा रहे हैं कि समाप्त हम स्वयं हो रहे हैं।

प्रकृति को समझिए..इस विविधता की अनिवार्यता को समझिए..संतुलन को समझिए..वरना अनुमानित है कि खरबों प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु हैं, कहीं हम यह सब समझने का प्रयास ही नही करें और सूक्ष्म जीवाणुओं को गिनने से पहले ही हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाए..

लेखिका:

ऋचा

About Author:

Richa did B.Tech from IIT Roorkee and was in the corporate world for 11 Years.She quit it as VP in Morgan Stanley.Since,then she has applied Science and traditional wisdom to understand different aspects of lifestyle which are against Nature.

चित्र साभार : इंटरनेट

Sushmita

View Comments

Recent Posts

Sudipta Dash, Runner-Up at Mrs India 2025: A Crown Forged by Discipline, Grace, and Purpose

Sudipta Dash, Runner-Up at Mrs India 2025: A Crown Forged by Discipline, Grace, and Purpose…

3 weeks ago

DON’T ANNOUNCE YOUR DREAMS. PROVE THEM.

DON’T ANNOUNCE YOUR DREAMS. PROVE THEM. Tia Sing at 52: Glamour, Grit, and a Back-to-Basics…

3 weeks ago

Life After 40: How Sreejata Mukherjee Is Redefining Strength, Aging, and Intentional Living

Life After 40: How Sreejata Mukherjee Is Redefining Strength, Aging, and Intentional Living By Sreejata…

3 weeks ago

From 75 kg to Stage Lights: The Glamorous Rise of Nabarupa Mukherjee

From 75 kg to Stage Lights: The Glamorous Rise of Nabarupa Mukherjee A Life Once…

3 weeks ago

Ozempic and the New Science of Weight Loss: Why It Works, Who It’s For, and Why It’s Not a Magic Pill

Ozempic and the New Science of Weight Loss: Why It Works, Who It’s For, and…

4 weeks ago

From Postpartum to Peak Form: How Simran Kaur Redefined Strength, Science, and Self-Belief After Motherhood

From Postpartum to Peak Form: How Simran Kaur Redefined Strength, Science, and Self-Belief After Motherhood…

4 weeks ago